फिल्म अभिनेत्री प्रिया राजवंश की हत्या किस तरह की गई थी

priya rajvansh ki mrityu kaise hui, priya rajvansh kaise mari

आपने ये सदाबहार गाने तो सुने ही होगें

"मिलो ना तुम तो हम घबराएं मिलो तो आंख चुराएं"

" ये माना मेरी जां मोहब्बत सजा है"

"अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों " 

इस तरह के सदाबहार गानों को अपनी अदाकारी से जीवंत करने वाली मशहूर अभिनेत्री को बहुत ही दर्दनाक तरीके से मारा गया था। आईए जानते हैं घटनाक्रम
 
 

प्रिया राजवंश बनी अपनों का ही शिकार


प्रिया राजवंश अपने दौर की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मानी जाती थीं। 
 
प्रिया राजवंश का जन्म 30 दिसंबर 1936 को शिमला में हुआ था। 
 
शुरुआती पढ़ाई के बाद प्रिया राजवंश ने लंदन के रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट में दाखिला लिया और रंगमंच से जुड़ गई। 
 
उनको नाटकों में बहुत ही रूचि थी। उस समय चेतन आनंद अपनी मल्टी स्टारर फिल्म हकीकत के लिए अभिनेत्री की तलाश कर रहे थे। 
 
अपने एक दोस्त के घर में प्रिया राजवंश से मुलाकात के बाद उन्होनें प्रिया राजवंश को अपनी मूवी में लेने का निर्णय लिया। 
 
इस तरह प्रिया राजवंश को अपनी पहली मूवी हकीकत मिली। 
 
चेतन आनंद उस समय अपनी पत्नी से अलग हो  चुके थे (तलाक नहीं हुआ था) और उनकी प्रिया राजवंश से मित्रता गहरी होती गई। 
 
प्रिया राजवंश चेतन आनंद से 16 साल छोटी थीं। चेतन आनंद प्रिया राजवंश के साथ ही रहने लगे और अपनी कुछ फिल्मों में उनको काम भी दिया।
 
चेतन आनंद के इस वव्यहार की वजह से चेतन की उनके भाईयों देव आनंद और विजय आनंद से काफी कहासुनी भी हुई।
 
भाइयों के बीच इस लड़ाई की वजह भी बिल्कुल सही थी क्योंकि चेतन आनंद ने अपनी पहली पत्नी उमा को तलाक नहीं दिया था और ना ही प्रिया राजवंश से शादी कर रहे थे। 
 
जिसके कारण प्रिया राजवंश की सामाजिक बुराई होने लगी थी। 
 
चेतन आनंद ने कभी भी प्रिया राजवंश से शादी नहीं की लेकिन वो उन्हीं के साथ रहते थे। 
 
प्रिया राजवंश ने अपने जीवन में सिर्फ 7 फिल्मों में काम किया और वो बहुत कामयाब भी रहीं। जैसे
 
"हकीकत" (1964)
"हीर रांझा" (1970)
"हिंदुस्तान की कसम" (1973)
"हस्ते जख्म" (1973)
"साहेब बहादुर" (1977)
"कुदरत" (1981)
"हाथों की लकीरें" (1986)

जब चेतन आनंद की मृत्यु हुई 6 जुलाई 1997 में उसके बाद प्रिया राजवंश पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।
 
चेतन आनंद ने अपनी वसीयत में प्रिया राजवंश को आजीवन अपने बंगले रुइया में रहने का हक दिया। 
 
चेतन और प्रिया के कोई संतान नहीं हुई थी इसलिए प्रिया राजवंश की मृत्यु के बाद यह संपत्ति चेतन आनंद के बेटों केतन आनंद और विवेक आनंद के नाम हो जाती। 
 
प्रिया रजवंश को उस बंगले और संपत्ति के लिए डराया धमकाया जाने लगा। 
 
उन्होंने विजय आनंद को ये सब बताया लेकिन उनकी किसी ने कोई सहायता नहीं की। 
 
इस बीच केतन आनंद और विवेक आनंद ने घर के नौकरों की सहायता से प्रिया राजवंश की हत्या का प्लान बनाया। 
 
26 मार्च 2000 को उनके नौकरों (अशोकन स्वामी और माला चौधरी) ने प्रिया राजवंश की चाय में नशीला पदार्थ मिला कर उनको बेहोश कर दिया। 
 
उसके बाद उनके नौकरों ने प्रिया राजवंश का गला दबा कर उनकी हत्या कर दी। 
 
लेकीन जब नौकरों को ये लगा की वो अभी भी नहीं मरी हैं तो उनके सर पर कपड़े धोने वाली मुंगरी से कई सारे प्रहार किए और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। 
 
हत्या के बाद खुद नौकरों ने पुलिस को सूचना दी की प्रिया रजवंश की मौत हो गई है। 
 
लेकिन पोस्टमार्टम में पता चला की मौत गला दबाने और सर पर कई प्रहार होने से हुई थी। 
 
जांच जब आगे बढ़ी तो केतन आनंद और विवेक आनंद पकड़े गए। 
 
कोर्ट ने केतन आनंद, विवेक आनंद और दोनों नौकरों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 
 
सन् 2011 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इनको जमानत पर रिहा कर दिया और ये मामला कोर्ट में अभी भी लंबित है। 
 
इस तरह से संपत्ति के लालच में अपनों के हाथों ही बेरहमी से मारी गईं प्रिया राजवंश।
 
 
 
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Lav Tripathi

Lav Tripathi is the co-founder of Bretlyzer Healthcare & www.capejasmine.org He is a full-time blogger, trader, and Online marketing expert for the last 10 years. His passion for blogging and content marketing helps people to grow their businesses.

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