वह जगह जहां ठंड की वजह से कभी गाड़ियां बंद नहीं की जाती, जानिए दुनियां की सबसे ठंडी जगह के बारे में

 
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हमारे भारत देश में जैसे ही तापमान 10°C के नीचे जाता है हम सब अपनी रजाई, कंबल, स्वेटर, जैकेट निकाल लेते हैं। लोग अल्टरनेट नहाना शूरू कर देते हैं 😂 और जैसे ही तापमान 5°C के नीचे जाता है स्कूल कॉलेज बंद हो जाते हैं। 
 
अगर हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएं जहां तापमान लगातार -50°C बना रहता है तो आप वहां रहना भी नहीं पसंद करेंगे। 
 
वहां इतनी ठंडी होती है की एक बार गाड़ी स्टार्ट कर दी फिर उसे बंद नहीं किया जाता क्योंकि ठंड की वजह से गाड़ी की बैट्री तक जम जाती है। 
 
एक बार गाड़ी बंद हो गई तो कम से कम 2-3 घण्टे तो स्टार्ट करने में लग जाते हैं। इसीलिए जो लोग रोजाना ड्राइव करते हैं वो अपनी गाड़ी रात भर स्टार्ट ही रखते हैं। 
 
जिनको कभी कभी गाड़ी इस्तेमाल करनी होती है वही अपनी गाड़ी बंद करते हैं। 


क्या है दुनियां की सबसे ठंडी जगह का नाम  Coldest Place In The World


तो आईए अब जानते हैं विश्व की सबसे ठंडी जगह का नाम, यह जगह है रूस में और उस जगह का नाम है आयम्याकों Oymyakon गांव।  
 
Oymyakon गांव रूस की राजधानी मास्को से ईस्ट की ओर 3000 मील की दूरी पर है।
 
30 किलोमीटर में फैले हुए इस गांव की कुल जनसंख्या है मात्र 500 और इस गांव का नाम यहां बहने वाली Oymyakon नदी के नाम पर पड़ा है। 
 
सबसे हैरानी की बात यह है की Oymyakon का मतलब होता है जहां पानी ना जमता हो लेकिन यहां यहां पानी तो छोड़िए इंसान तक जम जाए।😂
 
यहां की जनसंख्या लगातार कम होती जा रही है। सन् 2018 में यहां की जनसंख्या 900 थी जो। अब घटकर 500 के करीब हो गई है।
 

कैसा है Oymyakon के लोगों का रहन सहन


Oymyakon गांव के लोग मुख्यता अंडा, मछली, खरगोश, रेंडियर, घोड़े का मांस, ब्रेड और मोटे अनाज खाते हैं जो की दूसरे गांव से आता है। ठंडियों में यहां तापमान -60°C तक पहुंच जाता है। गर्मियों का तापमान -50°C तक रहता है। 


हर जगह लगे हैं थर्मामीटर


यहां लोगों की जानकारी के लिए और रिकॉर्ड के लिए जगह जगह थर्मामीटर लगाए गए हैं। Oymyakon गांव के मुख्य चौराहे पर एक बड़ा थर्मोमीटर लगा है जो तापमान के उतार चढ़ाव को दर्शाता है। 
 
यह गांव आर्कटिक सर्किल के बहुत पास है इसीलिए सर्दियों के मौसम में 24 घंटे में से 21 घंटे अंधेरा ही रहता है। कई बार तो कई कई दिनों तक सूरज ही नहीं दिखाई देता।


-50°C तापमान होने पर खुलते हैं स्कूल


हमारे भारत में 5°C के नीचे तापमान होने पर स्कूल बंद हो जाते हैं लेकीन Oymyakon गांव में जब गर्मियों में तापमान -50°C या इसके आस पास जाता है तब यहां स्कूल खुलते हैं और यहां एक स्कूल हैं जहां करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं।
 
यहां के लोग अपने घरों में लगातार हीटर जलाया करते हैं। ठंडियों में यह गांव पूरी दुनियां से कट जाता है।


पीने का पानी भी बाहर बाहर से आता है


आप को लग रहा होगा की पीने का पानी बाहर से क्यों मंगाया जाता है जबकि यहां इतनी बर्फ है। कभी भी बर्फ को पिघला कर पानी बना लें। 
 
लेकिन ऐसा नहीं है बर्फ को पिघला कर पानी बनाने के लिए आपको आग या ऊष्मा के स्रोत की आवश्कता होगी जो की बहुत ही कम है यहां इसीलिए सरकार यहां पर रोज पानी के स्पेशल टैंकर भिजवाती है। 
 
टैंकर पानी को गांव के एक बॉयलर में डाल देता है जो की पानी को गर्म करके लोगों के घरों में पहुंचाता है। 
 
ये लोग अपने घरों में खासतौर पर डिजाइन किए हुए थर्मस टाइप के बड़े बर्तन में यह पानी स्टोर कर लेटे हैं जिससे की पानी जमने ना पाए।
 
यहां के नालों में पानी ज्यादातर जमा ही रहता है इसलिए यहां के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
 

मरने के बाद क्या किया जाता है शरीर का


यहां अगर कोई व्यक्ती मरता है तो उसको जमीन में दफना दिया जाता है। यह भी बहुत ही मुश्किल काम होता है इसके लिए पहले जमीन को कई दिन तक गर्म किया जाता है ताकि उसके ऊपर की बर्फ हट सके फिर जमीन के कई फीट नीचे कब्र बनाकर शरीर को डाल दिया जाता है। 
 
यहां जमीन ढूंढ़ने के लिए कई कई दिन खुदाई करनी पड़ती है क्योंकि जमीन के अंदर भी कई फीट बर्फ जमी रहती है। जानवरों के मरने पर उनका शरीर ऐसे ही पड़ा रहता है जो की बाद में खा लिया जाता है या फिर सालों तक बर्फ में बिना सड़े दबा रहता है।


तुरंत ही सूख जाते हैं कपड़े


आपको लग रहा होगा की जब वहां इतनी ठंडी है तो कपड़े तुरंत ही कैसे सूख जाते हैं। दरअसल जब यहां कपड़े धोए जाते हैं तो उन्हें बाहर रख दिया जाता है। 
 
बाहर रखने पर कपड़ो का सारा पानी तुरंत बर्फ बन जाता है। फिर कपड़ो से बर्फ को झाड़ कर हटा दिया जाता है। इस तरह कपड़े मिनटों में सूख जाते हैं। हैं ना कमाल की जानकारी।


कैसे पहुंचे Oymyakon


इतनी ठंड होने के बाद भी कई सैलानी यहां घूमने आते हैं। लोग विश्व की सबसे ठंडी जगह जानें का रोमांच नहीं छोड़ पाते। 
 
यहां इतनी ठंड की वजह से कोई प्लेन लैंड नहीं हो सकता। यहां आने के लिए आपको यहां से सबसे पास रूस के एक शहर याकुतस से गाड़ी करनी होगी। 
 
वहां से यहां आने में दो दिन का समय लग जाता है। यहां आने वाले सैलानियों को खासतौर पर ट्रेनिंग दी जाती है ताकी वो इतनी ठंड को झेल पाए। 
 
आप खुद अगर इस गांव की ट्रिप प्लान करते हैं तो आप अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं क्योंकि यहां ठंड की वजह से आपको फ्रॉस्ट बाइट हो सकता है और आपके शरीर का वह अंग काटना पड़ सकता है। 
 
यहां ठंडी इतनी होती है की अगर आप पानी को हवा में उछालेगें तो वो हवा में ही बर्फ बन जायेगा और नीचे सिर्फ बर्फ गिरेगी।


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